प्लासी का युद्ध
[1] दोस्तों आपने कभी न कभी किसी न किसी युद्ध के बारे में तो सुना ही होगा जिसमे से है प्लासी युद्ध आज हम बात करते हैं प्लासी के युद्ध के बारे में जो 1 इतिहासिक युद्ध था ।
प्लासी का युद्ध का मुख्य कारण
दोस्तो बात करते हैं प्लासी के युद्ध का मुख्य कारण । ब्रिटिशों द्वारा बंगाल में अपना आधिपत्य करना दरअसल ब्रिटिसर्स यहां आए तो व्यापारिक सिल सिले के लिए थे परंतु अंग्रजों के मन की लालसा दिन वा दिन बढ़ती गई और वह अपना साम्राज्य विस्तार करने की सोचने लगे और अंततः उन्होंने प्लासी में बंगाल के नवाब के खिलाफ जंग छेड़ दी ।
ब्रिटिसो तथा बंगाल के नवाब के मध्य जंग
प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 को बंगाल के नवाब सिराज उद दौला की सेना और राबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के बीच हुआ सिराज उद दौला की सेना लगभग 50000 थी और वही क्लाइव की सेना महज 3200 थी ।
प्लासी युद्ध का परिणाम
सिराज उद दौला के सेनापति मीर जाफर के षडयंत में सामिल होने के कारण सेना 1 बड़े हिस्से ने युद्ध में भाग नहीं लिया ।जब सिराज उद दौला को पता चला कि उसके बड़े बड़े सेनानायक मीर जाफर और राय दुर्लभ उसके साथ विश्वासघात कर रहे हैं तो वह अपनी जान बचाकर मुर्शिदाबाद पहुंच गया और फिर वह वहां से भी अपनी पत्नी के साथ पटना भाग गया ।कुछ समय पश्चात मीर जाफर के पुत्र ने सिराज उद दौला की मृत्यु कर दी गई इस प्रकार अंग्रेजों का षडयंत सफल रहा ।
प्लासी युद्ध का महत्व
प्लासी के युद्ध में अंग्रेजों की विजय का बंगाल के इतिहास पर विषेस प्रभाव पड़ा।
- अंग्रजों की इस विजय से बंगाल के नवाब की स्थिति कमजोर पड़ गई भले ही यह विजय विश्वासघात या अन्य किसी साधन से प्राप्त की गई हो।
- बांह रूप से सरकार में कोई अधिक परिवर्तन नहीं हुआ और अभी भी नबाब सर्वोच्च अधिकारी था ,लेकिन व्यवहारिक रूप से कंपनी के प्रभुत्व पर निर्भर था । और कंपनी ने नबाब के अधिकारियों की नियुक्ति हस्तचेछेप करना शुरू किया
- नबाब के प्रशासन की आंतरिक कलह स्पष्ट रूप से प्रकट होने लगी और विरोधियों द्वारा अंग्रेजों के साथ मिलकर किए गए षडयंत ने अंततः प्रशासन की सकती को कमजोर कर दिया ।

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