भारत में पुर्तगाली
जैसा कि हम जानते है की भारत देश में कितनों ने राज किया है| उनमें से एक पुर्तगालियों का भी नाम आपने सुना भी होगा और पढ़ा भी होगा तो हम आज बात करेंगे पुर्तगालियों के बारे में ।
भारत में पुर्तगालियों की नजर
छठी शताब्दी के अंत तक , ग्रीस तथा रोमन जैसे यूरोपीय देशों के भारत के साथ व्यापक व्यापार संबंध थे।लेकिन रोमन साम्राज्य के पतन के साथ ही यूरोपीय देशों और भारत के मध्य चले आ रहे इस निष्कपट संबंध में 1 रिक्तिता आ गई। आगे चलकर केवल पंद्रहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा इस रिक्तिता को समाप्त किया गया ।
समुद्री मार्ग की खोज एवं पुर्तगालियों का आगमन (बास्को दा गामा)
जैसा कि आपने जाना की हम पुर्तगालियों के बारे में आपको अवगत करा रहे हैं।यद्यपि 15वी शताब्दी में भारत में बास्को दा गामा के आना से कई शताब्दी पूर्व यूरोपीय यात्री आते रहे थे । तथापि केप ऑफ गुड होप होकर जब वास्को डी गामा 17 मई 1498 में कालीकट पहुंचा ,तो इसने भारतीय इतिहास की दिशा को गहरे रूप से प्रभावित किया
पुर्तगालियों का मंतव्य
पुर्तगालियों का स्पष्ट मंतव्य था की वे व्यवसाय करने आए थे , लेकिन उनका छुपा हुआ एजेंडा था । ईसाई मत का प्रचार कर भारतीयों को ईसाइयत में परिवर्तित करना और अपने प्रतिषपर्धियो, विषेश रूप से अरब व्यापियों को बाहर खदेड़कर व्यापक रूप से मुनाफे वाले पूर्वी व्यापार पर एकाधिकार कायम करना । उस समय तक हिंद महासागर के व्यापार पर अरब व्यापारियों का एकाधिकार था
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